गर्मी में पेट से जुड़ी कई परेशानियां सामने आती हैं. जैसे-जैसे मौसम गर्म होता है, हमारी लाइफस्टाइल और खानपान की आदतें बदलने लगती हैं. मौसम के बढ़े हुए तापमान से न केवल हमें पसीना ज्यादा होता है, बल्कि इससे हमारी प्रतिरक्षा शक्ति भी कमजोर होती है. ऐसे में दूसरे किसी मौसम की तुलना में हमारे शरीर पर बैक्टिरिया और वायरस का अधिक आक्रमण होता है. हेल्थियंस की मेडीकल ऑफीसर डॉक्टर धृति वत्स बताती हैं कि दूसरे किसी मौसम की तुलना में गर्मी में खाना जल्दी खराब और होता है और बीमारी की वजह बनता है. उनका व चिकित्सकों का कहना है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, पेट के संक्रमण और अन्य परेशानियों के मामले करीब 45 प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं. गर्मियों में पेट की परेशानियों के सबसे ज्यादा शिकार ऐसे बच्चे या युवा होते हैं जो भोजन से पहले अपने हाथों को सही से साफ नहीं करते या बाहर का खाना खाते हैं, जो अनचाहे ही संक्रमित हो सकता है.
नक्सलवाद के लिए कुख्यात छत्तीसगढ़ के दोरनापाल की रहने वाली बेटी माया ने क्षेत्र की पहली एमबीबीएस डॉक्टर बनकर इतिहास रचा है. माया ने महज 10 वर्ष की उम्र में ही अपने पिता को खो दिया था. माया का कहना है कि उसने महज 10 साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था. उसका बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था, जिसे पूरा करने में वह लगी रही. डॉक्टर बनने के बाद वह गरीबों की सेवा करेगी. माया की बहन का कहना है कि पिताजी के निधन के बाद माया को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा. आर्थिक तंगी से भी गुजरना पड़ा, लेकिन माया के हौसले नहीं डगमगाए. बाधाओं से लड़ते हुए उसने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है. माया की इस उपलब्धि पर पूरा परिवार उसकी कामयाबी से खुश है.
जुकाम, सर्दी, खाँसी या हल्का सिर दर्द होने पर हम अक्सर अपने फर्स्ट ऐड बॉक्स से दवाई खासतौर पर एंटीबायोटिक्स लेकर खा लेते हैं जिससे हमें राहत मिल जाएं। हम में से अधिकतर लोग ऐसा करते हैं। हालांकि ऐसा करना हमारे स्वास्थ्य के लिए किसी भी तरह से उचित नहीं है। दर्द या परेशानी से राहत पाने का यह तरीका हमें किसी बड़ी परेशानी में डाल सकता है। नए शोध में यह बात पता चली है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पेडियाट्रिक्स नेशनल कॉन्फ्रेंस एंड एग्जीबिशन में एक शोध प्रकाशित हुआ है जिसमें कहा गया है कि बची हुई एंटी बायोटिक्स खाने से एंटीबायोटिक-रेसिसटेंट इंफेक्शन होने की संभावनाएं होती हैं। शोध की वरिष्ठ लेखक रुथ मिलानाइक ने बताया कि शोध के परिणामों चौंकाने वाले हैं। न्यूयॉर्क के कोहेन चिल्ड्रन्स मेडिकल सेंटर की डॉक्टर मिलानाइक ने कहा, “यह ना केवल उन लोगों के लिए खतरनाक है जो बिना डॉक्टर की सलाह लिए एंटीबायोटिक का सेवन करते हैं बल्कि जब लोग बची हुई दवाईयों का सेवन करते हैं, वह बैक्टीरिया जिसके लिए एंटीबायोटिक खाई जा रही है, दवाओं के प्रति रेसिसटेंट हो जाता है।” इस शोध के लिए नेशनल सैंपल के तौर पर ए...
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