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OMG! 15 करोड़ लोगों को है मेंटल हेल्थ केयर की जरूरत, पर क्यों!

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भारत में अनुमानित 15 करोड़ लोगों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल (mental healthcare) की जरूरत है. राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 (National Mental Health Survey) में इस बात का खुलासा हुआ है. मानसिक स्वास्थ्य (mental health) के लक्षणों और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जागरूकता में कमी के कारण देश में उपचार के बीच अंतर पैदा हुआ है. हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल ने कहा, "किसी भी मानसिक स्वास्थ्य विकार के लक्षण चिह्न्ति नहीं हैं, लेकिन कई बार वे अन्य स्थितियों की नकल लगते हैं. अधिकांश लोगों को केवल बेसिक देखभाल की आवश्यकता होती है. कुछ को तनाव, थकान और शरीर में दर्द होता है और किसी से बात करने या बस साथ बैठने का दिल करता है. यह केवल तब होता है जब ये लक्षण विकसित होते जाते हैं और चीजें बदतर होती जाती हैं, जिससे समय के साथ स्थिति गंभीर होती जाती है." उन्होंने कहा, "कई मामलों में अवसाद सहित मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं गरीबी, घरेलू हिंसा और कम उम्र में विवाह जैसी समस्याओं से जुड़ी हो सकती हैं. इसलिए, इस मुद्दे को समग्र रूप से देखना जरूरी है...

स्मार्टफोन, वॉट्सएप या फेसबुक नहीं, पोटैशियम की कमी से नहीं आ रही नींद

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आज की जेनेरेशन को रात में देर तक जागने की आदत है। मगर इसका खामियाजा यह होता है कि उन्हें दिनभर सुस्ती, थकान, और कमजोरी महसूस होती रहती है। आपके आसपास भी किसी को ऐसा हो रहा है, तो इसके लिए वॉट्सएप, फेसबुक या स्मार्टफोन को दोष देने से पहले पोटाशियम का स्तर जरूर चेक करवा लें। अक्सर शरीर में पोटाशियम की कमी से इस तरह की समस्याएं होने लगती हैं।  शरीर में पोटैशियम की कमी को हाइपोक्लेमिया कहा जाता है। स्वस्थ रहने और बीमारियों से बचने के लिए हर किसी के शरीर को रोजाना 47000 मिलीग्राम पोटैशियम की जरूरत होती है। क्योंकि पोटैशियम दिल, दिमाग और मांसपेशियों की कार्यप्रणाली को सुचारू ढ़ग से चलाने में मदद करता है। शरीर में पोटैशियम की कमी से हाइपोकैलीमिया और मानसिक रोग होने का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। आज हम आपको इसकी कमी के कुछ संकेत बता रहे हैं, जिनकी कमी से होने वाली समस्याओं को आप आसानी से पहचान सकते हैं। अनिद्रा की समस्या अगर आपके शरीर में भी पोटैशियम की कमी है तो आपको नींद न आने की समस्या हो सकती है। ऐसे में अनिद्रा की समस्या होने पर डॉक्टर से चेकअप करवाएं। तनाव अधिक तनाव या...

'Black Hairy Tongue': बला नहीं बीमारी है काली जुबान, जानें इसके बारे में...

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काली- बालों वाली जीभ (black hairy tongue in Hindi): आपको ड़रने की जरूरत नहीं है लेकिन यह सच है. अक्सर जब किसी की कही बात सच हो जाती है तो लोग उसे काली जुबान का कहते हैं. इसे गलत नजर और तरीके से देखा जाता है. यह तो हो गई कहने सुनने की बात, लेकिन अगर आप किसी ऐसे शख्स को देखते हैं तो घबराएं या ड़रें नहीं. इसमें अपशकुन या बुरी बला (hairy-looking tongue) जैसा कुछ नहीं है. वास्तव में जीभ पर काले बाल या बालों जैसा कुछ (black tongue) होना सेहत से जुड़ी एक समस्या का संकेत है.  मसूरी में डॉक्टर्स ने एक 55 साल की महिला में इस समस्या को डाइग्नोज किया. उस महिला को शिकायत थी कि उसे मितली (nausea) महसूस होती है और साथ ही साथ उसके मुंह के स्वाद में भी फर्क (foul taste in mouth) आया है. उनकी जुबान काली दिख रही थी और बालों जैसा (hairy-looking tongue) कुछ जीभ पर उभर आया था.  यह एक बहुत ही रेयर यानी कम दिखने वाली समस्या है. Photo Credit: iStock New England Journal of Medicine में छपी एक रिसर्च का यह भाग था. इस स्टडी के लीड ऑथर यासिर हामद के अनुसार यह एक बहुत ही रेयर यानी कम दि...

वजन घटाने के लिए आहार चार्ट

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डाइट चार्ट में इस बात का ख्याल रखा गया है कि आपको जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स मिलते रहें। वैसे जरूरी नहीं कि हर शख्स पर यह पूरी तरह से लागू होगा मगर हां आप इसमें थोड़ा फेरबदल कर अपना सकती हैं। एक खास बात आपको ये ध्यान रखनी होगी कि जब आप वजन घटाना शुरू करती हैं तो सबसे पहली कोशिश कुछ हद तक कामयाब हो जाती है। शुरू में आमतौर पर सभी लोगों का वजन दो चार किलो कम हो जाता है, मगर बाद में फैट कम नहीं होता। इसलिए हर बार आपको अपना डाइट चार्ट पहले के मुकाबले ज्यादा हार्ड बनाना होता है। वजन घटाने के लिए इस डाइट चार्ट को आप आजमाकर देखें फर्क जरूर पड़ेगा। वैसे तो हर व्यक्ति की शारीरिक संरचना और उसके द्वारा की जाने वाली मेहनत के हिसाब से खान-पान की आवश्यकता अलग-अलग होती है। इसके लिए बेहतर होगा बीएमआर निकाला जाए जो यह बताएगा कि शरीर को कम से कम कितनी कैलोरी की आवश्यकता है। शरीर का वजन कम करने के लिए कम कैलोरी लेनी चाहिए और इसके लिए बैलेंस्ड डाइट चार्ट बनाया जाना जरूरी होता है। दिमाग सुचारू रूप से कम करे और शरीर थके नहीं, इन बातों को ध्यान में रखते हुए 1200 से 1800 कैलोरी की आवश्यकता होती है। इतनी कै...

भारत में सिर्फ 35 प्रतिशत लोग ही करते हैं शारीरिक श्रम, जानें इसके नुकसान

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भारत में 35 फीसदी से ज्यादा लोग शारीरिक श्रम करने में आलस करते हैं। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का आंकड़ा है। डब्ल्यूएचओ के एक सर्वेक्षण के अनुसार, शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता नहीं दिखाने के कारण इन लोगों को दिल की बीमारी के साथ-साथ कैंसर, मधुमेह और मानसिक रोगों का खतरा बना रहता है।सर्वेक्षण के ये नतीजे 'द लांसेट ग्लोबल हेल्थ' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं, जिसमें बताया गया है कि 2016 में भारत में शारीरिक श्रम कम करने वाली महिलाएं करीब 50 फीसदी थीं, जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 25 फीसदी था। दुनियाभर में तीन में से एक महिला पर्याप्त शारीरिक क्रियाकलाप नहीं करती है, जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा चार में से एक है। एक्सरसाइज करने के फायदे अच्छी सेहत के लिए लड़कों को प्रतिदिन 13 हजार और लड़कियों को 11 हजार कदम चलने की सलाह देते हैं। किशोरों को रोजाना एक घंटे शारीरिक कसरत से जुड़े काम करने की सलाह दी जाती है।  नियमित रूप से 30-45 मिनट एक्‍सरसाइज करने से आपके दिमाग के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। यह आपके मूड को भी ठीक करता है। एक्‍सरसाइज से नई त...

पेन किलर दवाइयों से बढ़ सकता है दिल के दौरे का खतरा : अध्ययन

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लंदन:  सामान्य दर्द निवारक दवाई डाइक्लोफेनेक का इस्तेमाल दिल का दौरा और आघात जैसी हृदय संबंधी प्रमुख बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है. एक नए अध्ययन में इस बात को लेकर आगाह किया गया है. बीएमजे में प्रकाशित इस अध्ययन में डाइक्लोफेनेक के उपयोग की तुलना कोई भी दवा का प्रयोग नहीं करने, पैरासिटामोल तथा अन्य पारंपरिक दवा निवारक दवाओं से करने के साथ की गई है.  पेन किलर के पैकेट पर हो जोखिम का उल्लेख  डेनमार्क स्थित आरहुस विश्वविद्यालय अस्पताल के शोधकर्ताओं ने बताया कि डाइक्लोफेनेक सामान्य बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं होनी चाहिए और अगर यह बिकती है, तो उसके पैकेट के आगे के भाग पर इसके संभावित जोखिम का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया जाना चाहिए. डाइक्लोफेनेक एक पारंपरिक नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (एनएसएआईडी) होता है, जिसका इस्तेमाल दुनियाभर में बड़े पैमाने पर दर्द और सूजन के निवारण के लिए किया जाता है.  इस शोध में डाइक्लोफेनेक का इस्तेमाल शुरू करने वाले लोगों में हृदय रोग संबंधी जोखिम की तुलना अन्य एनएसएआईडी दवाइयों और पैरासिटामोल के इस्तेम...

कहीं आपकी थकान डायबिटीज़ का संकेत तो नहीं?

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अगर आपको भी बार-बार थकान महसूस होती है तो इसके कारण का पता लगा पाना बहुत मुश्किल होता है। हाल ही में एक स्‍टडी में सामने आया है कि जब किसी इंसान को दिन के एक ही समय पर थकान महसूस हो तो ये मधुमेह का लक्षण हो सकता है। खासतौर पर अगर उसमें डायबिटीज़ के और भी लक्षण नज़र आ रहे हैं तो संभावना और भी बढ़ जाती है।